अजमेर। ।

 शहर के एक निजी क्लिनिक में चिकित्सक की लापरवाही के कारण अविवाहित किशोरी की अवैध गर्भपात से हालत बिगड़ गई। जान खतरे में देख परिजन ने उसे राजकीय जनाना अस्पताल में भर्ती करवाया जहां चिकित्सकों ने रविवार रात ऑपरेशन कर गर्भ से भ्रूण के अवशेष बाहर निकाले। किशोरी की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।


राजकीय जनाना अस्पताल की महिला चिकित्सक के अनुसार देवरिया (अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार) निवासी पीडि़ता ने परिजन से पेट में दर्द की शिकायत की। हालत गंभीर होने पर परिजन ने किशोरी को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के बाद चिकित्सक के समक्ष किशोरी का गर्भपात कराए जाने की बात मालूम हुई। उसका चार दिन पूर्व उसने शहर के एक निजी क्लिनिक में गर्भपात करवाया गया था। 


गर्भपात के बाद वह घर चली गई लेकिन रविवार को पेट फूलने और तेज दर्द बताने पर परिजन ने उसे शाम 5.30 बजे जनाना अस्पताल पहुंचाया। रविवार रात्रि उसका ऑपरेशन कर भ्रूण के अवशेष निकाले व सफाई की। चिकित्सकों के अनुसार किशोरी की हालत नाजुक है। उसे वेंटीलेटर पर 48 घंटे के ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। महिला चिकित्सक के अनुसार किशोरी 6 माह से गर्भवती थी।


क्लिनिक की तस्दीक का प्रयास

अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पहुंची आदर्शनगर थाना पुलिस ने किशोरी के परिजन से पूछताछ की। पुलिस ने किशोरी की मां से आदर्शनगर स्थित निजी क्लिनिक की तस्दीक करवाने का प्रयास किया। लेकिन उसके परिजन ने शिकायत देने से इन्कार कर दिया। जबकि पीडि़ता कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।


अवैध संबंध पर पर्दा डालने की कोशिश!


अविवाहित किशोरी के गर्भधारण एवं अवैध संबंध को छिपाने की कोशिश की गई। किशोरी ने ही नहीं परिजन ने भी अस्पताल के रिकॉर्ड में गांव का नाम गलत लिखवाया दिया। किशोरी जहां अपना गांव देवरिया बता रही है वहीं किशोरी का भाई व परिजन कभी मसूदा तो कभी राजोसी (देवरिया का बाडिय़ा) बताकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे।


भाई को ही बना दिया पति!


किशोरी ने अस्पताल के रिकॉर्ड में अपने ही भाई फुरकान (बदला हुआ नाम) लिखवा दिया, जबकि किशोरी अविवाहित है। अस्पताल में मौजूद उसके दूसरे भाई ने बताया कि इस नाम से उसका भाई है, बहिन की शादी नहीं हुई है। वह छठी-सातवीं पढऩे के बाद घर पर ही रहती थी।


पीडि़ता को भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया। पीडि़ता छह माह की गर्भवती थी जिसका निजी क्लिनिक से चार दिन पूर्व गर्भपात करवाया गया। उसके गर्भ में कुछ अवशेष (छोटे टुकड़े) रह गए थे। किशोरी का रात्रि में ऑपरेशन कर अवशेष निकाल दिए हैं। पीडि़ता को 48 घंटे ऑब्जर्वेशेन में रखा गया है।


-डॉ. दीपाली जैन, वरिष्ठ चिकित्सक जनाना अस्पताल