अजमेर/ भीलवाड़ा। ।

 सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 805वें उर्स का झंडा 24 मार्च को चढ़ाया जाएगा। झंडा लेकर भीलवाड़ा का गौरी परिवार बुधवार को अजमेर आएगा। 

गौरी परिवार के फखरूद्दीन गौरी बुलंद दरवाजे पर झंडा फहराने की रस्म अदा करेंगे। उर्स के मौके पर झंडा चढ़ाने की रस्म गौरी परिवार पिछले 72 वर्ष से निभा रहा है। 

फखरूद्दीन ने बताया कि 24 मार्च को शाम दरगाह गेस्ट हाउस से जुलूस शुरू होगा। झंडा चढ़ाने की रस्म सैयद अबरार अहमद की सदारत में होगी। गौरी परिवार अकीदत का नजराना ख्वाजा साहब की मजार पर पेश करेगा।

वर्ष 1944 से परम्परा

उर्स में झंडा चढ़ाने की परम्परा 1928 में पेशावर के सैयद अब्दुल सत्तार बादशाह जान ने शुरू की थी। इसके बाद भीलवाड़ा के गौरी परिवार ने 1944 से उर्स का झंडा चढ़ाने की परम्परा को निभाना शुरू किया। 

गौरी परिवार के लाल मोहम्मद गौरी ने 1944 से 1991 तक उर्स का झंडा चढ़ाया। इसके बाद मोइनुद्दीन गौरी ने 2006 तक परम्परा निभाई। इसके बाद से फखरूद्दीन गौरी उर्स का झंडा चढ़ाने की रस्म निभा रहे हैं।

तोपो की देते हैं सलामी

झण्डा चढ़ाने की रस्म शाम 5 बजे शुरू होती है। दरगाह गेस्ट हाउस से झंडे को जुलूस के साथ ले जाते है। इस दौरान तोपो की सलामी भी दी जाती है।