मुंबई ।

देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने मैनेजर स्तर पर 1500 कर्मचारियों तक की छंटनी करने का ऐलान किया है। कंपनी में कुल 13,000 प्रबंधक हैं जिसमें से 10 से 12 प्रतिशत यानी 1,500 तक की कटौती की गई है। टाटा मोटर्स की ओर से कहा गया है कि संगठन को पुनगर्ठित करने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया गया है। हालांकि टाटा मोटर्स प्रबंधन ने कहा है कि छंटनी का असर कामगारों की नौकरियों पर नहीं पड़ेगा। 



कई कंपनियां कर चुकी हैं छंटनी

कंपनी के चीफ  फाइनेंशियल अधिकारी सी रामकृष्णन ने कहा कि हमें इस फैसले तक पहुंचने में हमें 6 महीने से ज्यादा का समय लगा। छंटनी के समय परफॉर्मेंस और नेतृत्व क्षमता जैसी खूबियों का ध्यान रखा गया। बीते कुछ महीनों में सॉफ्टवेयर समेत कई सेक्टर की कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की छंटनी की है। इसे यूस की नीतियों में बदलाव से लेकर स्वचलित तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को इसकी वजह माना जा रहा है।  इंजीनियरिंग सेक्टर की बड़ी कंपनी लार्सन एंड ट्यूब्रो ने मौजूदा वित्तीय साल के पहले हिस्से में 14 हजार कर्मचारियों की नौकरी खत्म करने का ऐलान किया था। एचडीएफसी बैंक इसी साल 10 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी कर चुका है।



टाटा मोटर्स की आमदनी, मुनाफे में गिरावट

टाटा मोटर्स का राजस्व वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में 77,272 करोड़ रुपए रहा जो कि पिछले साल की समान तिमाही में 79,549 करोड़ रुपये था। कंपनी ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी के समेकित राजस्व में 9,032 करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण ब्रिटिश पाउंड से रुपये की कीमत में आई गिरावट है। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का मुनाफा घटकर 5,166 करोड़ रुपए रहा, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में यह 5,888 करोड़ रुपए था। 



कंपनी ने समीक्षाधीन तिमाही में 4,336 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जोकि इससे एक साल पहले की समान अवधि में 5,211 करोड़ रुपए था। कंपनी ने कहा कि 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष में 2,69,850 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष में 2,73,111 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2016-17 में टाटा मोटर्स को 7,557 करोड़ रुए का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ, जोकि एक साल पहले 11,678 करोड़ रुपए था।