नई दिल्ली। ।

पीएम मोदी द्वारा घोषित नोटबंदी के बाद बैंकों में पुराने नोटों को जमा के विषय में इनकम टैक्स विभाग ने 18 लाख लोगों से जवाब मांगा था। इनमें 7 लाख लोगों ने जवाब दे दिया और 9 लाख लोगों ने विभाग को कोई जवाब नहीं दिया। विभाग ने इन खातों को संदिग्ध मान रही है। इन सभी लोगों को भेजे गए एसएमएस और ई-मेल के जरिये सवाल पूछे गए थे। जवाब के लिए विभाग ने 15 फरवरी की डेडलाइन दी थी।



आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बैंक जमा पर प्राप्त सात लाख जवाबों में मिले आंकड़ों में से 99 फीसदी सही मिले हैं। इनकम टैक्स विभाग द्वारा बैंक में जमा रकम पर ई-मेल और एसएमएस से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं देने वालों को गैर-सांविधिक पत्र भेजे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक विभाग ने 9 लाख खाताधारकों को संदिग्ध कैटेगरी में रखा है। इनके खिलाफ  कार्रवाई नई टैक्स छूट योजना की अवधि 31मार्च को पूरी हो रही है।



गौरतलब है कि इनकम टैक्स विभाग ने नोटबंदी के दौरान पांच लाख रुपए से अधिक की बैंक डिपॉजिट करवाने वाले 18 लाख लोगों को अपने ऑपरेशन क्लीन मनी के तहत एसएमएस तथा ईमेल भेजे थे। सभी खाताधारकों से डिपॉजिट और सोर्स के बारे में सफाई देने के लिए 15 फरवरी तक का समय दिया गया था।



केन्द्र सरकार ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा करते हुए आधी रात से 500 और 1000 रुपए की प्रचलित करेंसी को अमान्य घोषित कर दिया था। इसके बदले 2000 रुपए की नई करेंसी का संचालन किया गया। हालांकि कुछ दिनों बाद 500 रुपये की नई करेंसी भी बाजार में उतार दी गई थी।