जयपुर। ।


सरकारी विद्यालयों में नामांकन वृद्धि और शिक्षा का अधिकार कानून को लेकर बनी फिल्म हिंदी मिडियम को अब गुरुजी भी देखना चाहते हैं। बडा सवाल ये है कि क्या गुरुजी फिल्म देखकर ही सिस्टम को सुधारेंगे। जबकि सरकार सरकारी स्कूलों में नामांकन बढाने और निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार कानून को लेकर पहले ही काफी प्रयास कर रही है। सरकारी स्कूलों के हालात किसी से छिपे नहीं हैं, अकेले गुरुजी ही नहीं सिस्टम में सुधार के लिए सरकार भी दोषी है।



शिक्षकों व कार्मिकों को फिल्म दिखाने के लिए हाल ही राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने सभी कार्मिकों व शिक्षकों को फिल्म दिखाने के लिए फिल्म को टैक्स फ्री कराने की मुख्यमंत्री से मांग की थी। राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने भी इस फिल्म को देखने के लिए जनहित में राहत ​दी है।



फिल्म में निजी स्कूलों की मनमानी और सरकारी स्कूलों की मेहनत को दर्शाया गया है। शिक्षा के अधिकार कानून का मखौल जिम्मेदार ही उडा रहे हैं ये भी बताया है। फिल्म के माध्यम से आमजन को एक संदेश दिया गया है कि वे अपने बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला कराएं और उनमें आधारभूत सुविधाओं के लिए भामाशाह भी बनें।



ये है फिल्म में 

फिल्म में बताया गया है कि किस तरह से निजी स्कूलों में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम का मखौल उडाकर गरीब कोटे में रहीसों के बच्चों का दाखिला हो रहा है। फिल्म में हकीकत बयां ​कि गई है उसमें बताया गया है कि किस तरह से चोरी, चिटिंग, चकारी, धोखेबाजी और धांधलेबाजी कर एक पिता अपनी लाडली बेटी को शहर के एक नामचीन स्कूल में फर्जीवाडे से गरीब बनकर गरीब कोटे में आखिर दाखिला दिला देता है। अंत में जब पोल खुलती है तो वह अपनी बेटी को नामचीन अंग्रेजी माध्यम के स्कूल से निकालकर ​सरकारी स्कूल में दाखिला कराता है और सरकारी स्कूल को भी गोद ले लेता है। 



फिल्म में बताया है कि यदि राजनेता व अधिकारी अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराएं तो सरकारी स्कूलों का स्तर खुद ब खुद सुधर जाए।