पचलंगी ।

दिल में अगर कुछ करने की ख्वाहिश हो तो परेशानी व विफलता कोई मायने नहीं रखती है। लक्ष्य को लेकर इरादे पक्के हो तो एक न एक दिन सफलता अवश्य आपके कदम चूमती है। कुछ इसी तरह के जज्बे के साथ कुछ बनने की चाहत रखी थी उदयपुरवाटी के जोधपुरा गांव की नीलम मीणा ने। हालांकि न्यायिक सेवा में जाने के उसके प्रयास को पहली बार में मिली विफलता ने उसको विचलित जरूर किया। लेकिन उसने हार नहीं मानी। जिसका परिणाम हुआ कि दूसरे प्रयास में उसे सफलता मिल ही गई। नीलम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गंगानगर में पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्हें जयपुर जाना पड़ा। वहीं से उन्होंने लॉ की पढ़ाई की।


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बेटे-बेटियों में कोई भेदभाव नहीं


नीलम के पिता प्रहलाद राय मीणा पंजीयन व मुद्रण विभाग से सेवानिवृत  व माता मुखी देवी गृहिणी है। बच्चों के पालन पोषण को लेकर दोनों ने बताया कि बेटा व बेटी में कभी भेदभाव नहीं किया। सभी को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलवाई गई। जिसका परिणाम ही है कि बेटी नीलम आज आरजेएस के रूप में सेवा दे रही है।


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एक साल तक की थी वकालत


नीलम ने कालेज की पढ़ाई के दौरान ही न्यायिक सेवा में जाने की ठान ली थी। जयपुर में लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे वहीं न्यायालय में एक साल तक वकालत की। पहली बार परीक्षा देने पर वो सफल नहीं हुई। इसके बाद पूरी तैयारी के साथ 2014 में फिर परीक्षा दी। इस बार उसे सफलता मिल गई। नीलम वर्तमान में अलवर जिले के नीमराणा में जज के पद पर कार्यरत है।