नागौर. श्रीबालाजी थाना क्षेत्र के अलाय गांव की विवाहिता से गैंगरेप के बाद पैदा हुए बच्चे के शव को मौत के करीब 8 माह बाद जमीन से निकाला है। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में नवजात के शव को निकालने की खबर से गांव ही नहीं पूरे जिले में विवाहिता से चर्चित गैंगरेप का मामला एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। 



चर्चा में आने का कारण आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि नवजात का 8 माह पूर्व दफनाया गया शव बाहर निकालना रहा। पीडि़ता द्वारा उसके मृत बच्चे की दुबारा डीएनए जांच की मांग के बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी रविवार को अलाय पहुंचे तथा बालक का दफनाया गया शव निकालकर डीएनए टेस्ट के लिए सैम्पल लिए। 



इस दौरान नागौर एसडीएम परसाराम टाक, मकराना सीओ पूनमसिंह व नागौर जेएलएन अस्पताल के चिकित्सकों की टीम मौजूद रही। टीम ने गड़े शव को बाहर निकाल कर डीएनए के लिए सैंपल लिए। 

इस दौरान मौके पर ग्रामीणों की भीड़ उकत्र हो गई तथा बच्चे का शव निकालना चर्चा का विषय बन गया। 


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जानिए, क्या था मामला

गौरतलब है कि गत वर्ष 8 अगस्त को श्रीबालाजी थाने में रिपोर्ट देकर अलाय निवासी आरएसी कांस्टेबल की पत्नी ने आरोप लगाया कि गांव के एक शिक्षक कैलाश, पुलिसकर्मी सुभाष व एक अन्य युवक सहीराम ने उसके साथ कई बार गैंगरेप किया। पीडि़ता ने रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया था कि उसके पेट में बच्चा है और वह गैंगरेप के चलते हुआ है। मामला दर्ज कराने के कुछ समय बाद यानी २६ अगस्त को पीडि़ता ने बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में बालक को जन्म दिया, लेकिन जन्म के ५ दिन बाद ही नागौर के जेएलएन अस्पताल में बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत पर परिजनों की मांग पर पुलिस ने डीएनए का सैंपल लिया था, लेकिन सैम्पल का आरोपितों के डीएनए से मिलान नहीं हुआ। 


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डीएनए के लिए लिए दुबारा सैम्पलपरिजनों ने तत्कालीन जांच अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए सैम्पल में गडग़ड़ी का आरोप लगाया। इस पर एसपी परिस देशमुख ने दुबारा सैम्पल लेने के आदेश दिए। डीएनए मिलान के लिए दुबारा सैम्पल के आदेश मिलने पर मकराना डीएसपी व नागौर एसडीएम ने रविवार को सैम्पल लेने की प्रक्रिया पूरी की। अब सैंपल को दुबारा डीएनए जांच के लिए भेजा जाएगा और आरोपितों के डीएनए से मिलान किया जाएगा। गौरतलब है कि यह नागौर जिले का चर्चित गैंगरेप मामला है और एक बार फिर चर्चा में आया है। इस मामले में परिजन कई बार आरोप लगा चुके हैं कि दबाव के चलते पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर रही है।