राजेंद्र शर्मा, जयपुर। ।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रांची टेस्ट भले ही ड्रॉ हो गया, लेकिन अरसे बाद लगा मानो क्रिकेट जीता। जी हां, जब वन-डे फॉरमेट शुरू हुआ था, क्रिकेट प्रेमियों को डर था टेस्ट क्रिकेट न हार जाए। कुछ समय एक दिवसीय क्रिकेट का रंग टेस्ट क्रिकेट पर चढ़ता भी दिखा, वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया के साथ ही श्रीलंका और भारत पर भी इसका असर साफ नजर आया। 



फिर, दे दनादन वाला फॉरमेट टी-20 आया तो ताबड़तोड़ खेलने वालों का बोलबाला हो गया, तकनीकी रूप से गलत माने जाने वाले शॉट्स इजाद हुए। टेस्ट मैच ढाई, तीन, चार दिन में खत्म होने लगे। लगा मानो पांच दिवसीय मैच की प्रतिष्ठा, तकनीक, क्रीज पर खड़े रहने की क्षमता और संयम कहीं इतिहास न बन जाए। 



गाहे-ब-गाहे ही ऐसे टेस्ट मैच हुए, जिनमें अंतिम दिन या बॉल तक रोमांच रहा। भारतीय क्रिकेट को ही लें, भले ही हालिया घरेलू सीज़न में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड या बांग्लादेश से टेस्ट जीते हैं, लेकिन कितने पांचवे दिन तक गए! ज्यादातर तो ढाई या तीन दिन में ही निपट गए। 



वर्तमान सीरीज में भी पुणे में भारत ढाई दिन में हारा तो बेंगलूरु में साढ़े तीन दिन में ही जीत गया। इन मैचों में बल्लेबाजी में टेस्ट मैच के लिए जरूरी संयम, तकनीक और अनुशासन की जबरदस्त कमी नज़र आई। ऐसे में तीसरा टेस्ट रांची में पांचवे दिन तक खिंचा, वह भी तमाम तरह के उतार-चढ़ाव और रोमांच के बाद। 



आखिरी दिन, ऑस्ट्रेलिया ने जब महज़ 63 रन पर 4 अहम विकेट खो दिए, तो भारत की जीत की उम्मीद को पंख लगे। तब मैच में दूसरी बार सही मायने में टेस्ट क्रिकेट की क्लास सामने आई। शान मार्श और हैंड्सकोंब ने 62.1 ओवर बैटिंग कर 124 रन की साझेदारी ही नहीं कि, हार का खतरा भी टाल दिया। 



ऐसा नहीं था कि भारतीय बॉलिंग में कोई खामी थी, विश्व के दो सर्वश्रेष्ठ स्पिनर अश्विन और जडेजा बॉलिंग कर रहे थे, उन्हें झेलने और खेलने के लिए संयम और बेहतरीन तकनीक की दरकार थी, जो इन दोनों ऑसी बल्लेबाजों में दिखी। 



इससे पूर्व पहली पारी में 451 रन बना खुद को महफूज़ समझ बैठे कंगारुओं को भी तब हार की टंकार सुनाई देने लगी, जब 140 रन पर 4 विकेट खो चुकी टीम इंडिया के चेतेश्वर पुजारा और रिद्धिमान साहा ने टेस्ट क्रिकेट का अनुशासन और धैर्य दिखाते हुए 199 रन की पार्टनरशिप की। इन दोनों की पारी भी टेस्ट क्रिकेट की बेहतरीन पारियों में शुमार हो गई।



पुजारा ने शानदार टेंपरामेंट दिखाते हुए जहां 525 बॉल पर दोहरा शतक जमाया, वहीं साहा ने 266 बॉल पर 117 रन की पारी खेली। यही पार्टनरशिप थी, जिससे इस मैच में रोमांच आया और अंत तक कायम रहा। तो, कहा जा सकता है कि यह टेस्ट मैच भले ही ड्रॉ हुआ हो, जीत क्रिकेट की हुई है।