जोधपुर ।

वैज्ञानिकों को राडार का आकार कम करने और उसकी बैंडविड्थ बढ़ाने में सफलता मिल गई है। इससे राडार के अनुप्रयोग बढ़ जाएंगे। राडार छोटा होने से इसे ड्रोन और अनमेन्ड एरियल व्हीकल (तश्तरी) पर लगाकर शत्रुओं से सुरक्षा भी की जा सकेगी। ड्रोन पर राडार लगा होने से मौसम की भविष्यवाणी को भी और अधिक सटीक किया जा सकेगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मदद भी मिलेगी।

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यह बात जर्मनी के केमिट्ज विश्विद्यालय के प्रो. मधुकर चंद्रा ने बताई। इंटरनेशनल सेंटर फॉर रेडियो साइंस (आईसीआरएस)की ओर से आयोजित सेमिनार के तकनीकी सत्र में प्रो. चंद्रा ने विभिन्न प्रकार के राडार, राडार की मदद से रिमोट सेंसिंग और एंटीना के साथ ही मल्टी पैरामीटर राडार की सहायता से बेहतर रिमोट सेंसिंग की तकनीक भी बताई। आईसीआरएस की ओर से माइक्रोवेव, रिमोट सेंसिंग और एंटीना पर आयोजित तीन दिवसीय 12 वें अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन गुरुवार को चार तकनीकी सत्र हुए।

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दूसरे तकनीक सत्र में डॉ. आरके मालवीय ने विभिन्न प्रकार के एंटीना के बारे में बताया। तीसरा सत्र माइक्रोवेव कम्पोनेंट, डिवाइस व सर्किट पर रखा गया। इसमें सीरी पिलानी के डॉ. एसएन जोशी ने माइक्रोवेव डिवाइस के बारे में बताया। शाम को प्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन पर तकनीकी सत्र रखा गया। इस सत्र की अध्यक्षता आईसीआरएस के निदेशक प्रो. ओपीएन कल्ला ने की। सभी तकनीकी सत्रों में माइक्रोवेव और रिमोट सेंसिंग की बेहतर तकनीक और भविष्य के इसके अनुप्रयोग के बारे में बताया गया।