उदयपुर. ।

रोहिणी नक्षत्र की गर्मी से बचाव के लिए भगवान जगन्नाथ स्वामी को इन दिनों चंदन का लेप किया जा रहा है। शहर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में बिराजे प्रभु को हल्के वस्त्र धारण करवाए गए। साथ ही प्रभु के शरीर पर चंदन का लेप किया गया।



इसी तरह शहर के सेक्टर 7 स्थित जगन्नाथ धाम में भी पुरी की तर्ज पर परम्पराओं का निर्वहन किया जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा को अत्यधिक स्नान से भगवान बीमार होते हैं। इसके बाद भगवान को औषधीय गुणों युक्त काढ़े का भोग लगाया जाता है। तब तक पट बंद रहते हैं।  



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आषाढ़ शुक्ल एकम को होगा प्राकट्य


जगन्नाथ रथ

भगवान को पूर्णतया स्वस्थ्य होने में लगभग पंद्रह दिन का समय लग  जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकम के दिन सुबह करीब 11 बजे भगवान का प्राकट्य होगा। इस अवसर पर भगवान नवयौवन के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान के पाकट्य पर 36 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। द्वितीया को रथ में बिराजकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। उदयपुर में भी पुरी की तर्ज पर जगदीश मंदिर और जगन्नाथ धाम से रथयात्रा हर वर्ष निकाली जाती है।